पुलिस वाली को मिली अपनी गांड पर पट्टे मरवाने की सजा | Hindi Police Punishment Stories

पुलिस वाली को मिली अपनी गांड पर पट्टे मरवाने की सजा | Hindi Police Punishment Stories

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Hindi Police Punishment Stories में पढ़ें कि केसे एक पुलिस अधिकारी प्रिया शर्मा को एक मामले में रिश्वत लेने पर अपनी गांड पर पट्टे खाने कि सजा मिली

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Hindi Police Punishment Stories में पढ़ें कि केसे एक पुलिस अधिकारी प्रिया शर्मा को एक मामले में रिश्वत लेने पर अपनी गांड पर पट्टे खाने कि सजा मिली
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पुलिस वाली को मिली अपनी गांड पर पट्टे मरवाने की सजा | Hindi Police Punishment Stories

रानीपुर थाने की सब-इंस्पेक्टर प्रिया शर्मा एक सख्त और आक्रामक पुलिस अधिकारी थी।

उम्र 26 साल, लंबा कद, गोरा रंग, घने काले बाल और एक फिट बॉडी उसकी कमर पतली थी लेकिन नितंब भरे-भरे और गोल थे, जो यूनिफॉर्म की पैंट में फंसकर और भी उभर आते थे।

थाने में सब उसे "मैडम" कहकर डरते थे प्रिया भ्रष्ट थी छोटे-मोटे अपराधियों से रिश्वत लेती, निर्दोषों को फंसाती और अपनी मनमानी करती एक दिन थाने में एक बड़ा मामला आया अमीर व्यापारी विक्रम सिंह का बेटा राहुल गलती से एक दुर्घटना में फंस गया था।

और प्रिया ने मौके का फायदा उठाते हुए राहुल को थाने में बंद कर लिया और उसके पिता से 10 लाख रुपये रिश्वत मांगी।

तो विक्रम सिंह ने बहुत मनाया लेकिन प्रिया नहीं मानी आखिरकार विक्रम ने ऊपर तक शिकायत कर दी सीआईडी से इंस्पेक्टर राघव राणा को केस की जांच सौंपी गई।

राघव सख्त, मस्कुलर और 28 साल का था उसने पूरे मामले की जांच की और प्रिया की सारी करतूतें सामने आ गईं रात के 10 बजे थाने में कोई नहीं था राघव ने प्रिया को अपने कमरे में बुलाया “प्रिया, तुम्हारी सारी फाइलें तैयार हैं तुम्हें सस्पेंड किया जा रहा है और क्रिमिनल केस भी चलेगा लेकिन... मैं तुम्हें एक मौका दे सकता हूं अगर तुम अपनी सजा यहाँ, अभी, मेरे सामने स्वीकार कर लो तो मैं रिपोर्ट को हल्का कर दूंगा” प्रिया घबरा गई “सर, क्या सजा?” राघव ने अपनी डेस्क से एक मोटा चमड़े का पट्टा निकाला पुराना पुलिस पट्टा, और मोटा, सख्त और लंबा उसकी आंखों में सख्ती थी।

“और बोले तुम्हारी गंदी हरकतों की सजा... तुम्हारी गांड़ पर 50 पट्टे पडेंगे।

और‌ वो भी बिना कपड़ों के और हर मार के बाद दर्द का पूरा ब्यौरा तुम्हें खुद बोलना पड़ेगा” प्रिया का चेहरा लाल हो गया शर्म और डर से उसकी टांगें कांपने लगीं।

लेकिन नौकरी बचाने के लिए उसे मानना पड़ा राघव ने दरवाजा बंद कर दिया और पर्दे खींच दिए “कपड़े उतारो सिर्फ ब्रा और पैंटी रहने दो प्रिया ने कांपते हाथों से अपनी खाकी शर्ट, पैंट उतारी उसकी सफेद त्वचा चमक रही थी उसकी पैंटी में भरे हुए गोल-मटोल नितंब बाहर निकल आए।

फिर राघव ने उसे डेस्क पर झुकने को कहा।

और फिर प्रिया ने दोनों हाथ डेस्क पर टिका दिए, कमर झुकाई उसकी गांड़ ऊपर की ओर उभर आई राघव ने पट्टे को मोड़ा और पहले हल्का सा झटका दिया और पहली मार पट्टा सीधा उसके दाएं नितंब पर पड़ा “आआआह!” प्रिया चीखी “सर... जलन हो रही है... जैसे आग लग गई हो चमड़ी में गहरा दर्द... सनसनाहट फैल रही है।”

फिर राघव ने दूसरी मार मारी, इस बार बाएं नितंब पर पट्टे की चौड़ी पट्टी ने मांस को जोर से दबाया।

फिर प्रिया के नितंब लाल हो गए “उफ्फ... बहुत तेज दर्द... जैसे कोई लोहे की छड़ से मारा हो मांसपेशियां सिकुड़ रही हैं, जलन बढ़ रही है।”

और फिर तीसरी, चौथी, पांचवी मार... लगातार प्रिया की चीखें कमरे में गूंज रही थीं “सर... छठी मार... आह! पूरी गांड़ जल रही है लाल-लाल निशान पड़ गए हैं हर मार के साथ दर्द गहरा होता जा रहा है मांस हिल रहा है, पट्टा जहां पड़ता है वहां तीखी जलन और भारी दबाव...

जैसे कोई आग का तेल डाल दिया हो।”

और फिर राघव रुकता नहीं था वह पट्टा ऊपर से नीचे तक घुमाता, कभी दाएं, कभी बाएं, कभी दोनों नितंबों के बीच की दरार पर बीच की सजा १५वीं मार के बाद प्रिया की पैंटी भी उतार दी गई।

अब उसकी नंगी गांड़ पूरी तरह सामने थी – लाल, सूजी हुई, पट्टे के निशानों से भरी “अब असली सजा शुरू होती है” अगली 10 मारें बहुत तेज थीं पट्टा हवा में सीटी मारता हुआ आता और प्रिया की नरम चमड़ी पर जोर से गिरता “आआआह! सर... 19वीं... बहुत दर्द हो रहा है! गांड़ फट रही है।

और हर मार पर मांस हिलता है, दर्द अंदर तक चुभता है सूजन बढ़ रही है, चमड़ी तनी हुई है मैं सह नहीं पा रही... लेकिन... जारी रखिए” प्रिया की आंखों से आंसू बह रहे थे।

और उसके नितंब अब गहरे लाल रंग के हो चुके थे,

जगह-जगह नीले निशान पड़ गए थे पट्टा जहां-जहां पड़ता, वहां तुरंत सूजन आ जाती दर्द इतना था कि वह अपने पैरों को आपस में रगड़ रही थी राघव पट्टे को थोड़ा मोड़कर मारता, ताकि किनारा ज्यादा चुभे “24वीं मार!” पट्टा सीधा दोनों नितंबों के बीच पड़ा।

और प्रिया जोर से चिल्लाई – “आईईईई... सर! वहां बहुत नाजुक जगह है... जलन जैसे बिजली की तरह दौड़ गई दर्द कमर तक जा रहा है मेरा पूरा पीछा आग बन गया है।”

और 30वीं मार तक प्रिया की गांड़ पूरी तरह सूज चुकी थी लालिमा गहरी हो गई थी, हर मार पर वह कांप उठती “सर... ३२वीं... आह! पट्टा मेरी चमड़ी को चीर रहा है दर्द इतना तीव्र है कि सांस रुक रही है मांसपेशियां बार-बार सिकुड़ रही हैं हर बार पट्टा उठता है तो राहत मिलती है, लेकिन गिरते ही आग लग जाती है।

फिर राघव ने आखिरी 20 और मारें और तेजी से।

और अब प्रिया रो रही थी, लेकिन उसकी आवाज में एक अजीब सी लाचारी थी “45वीं... उफ्फफ! गांड़ फूल गई है बैठ भी नहीं पाऊंगी दर्द हड्डियों तक पहुंच रहा है।

और हर पट्टे का हर निशान अलग-अलग जलन दे रहा है।”

और आखिरी मार – 50वीं राघव ने पूरे जोर से मारा पट्टा प्रिया की सूजी हुई गांड़ पर पड़ा “आआआआह!!!! सर... बस... बहुत हो गया मेरी गांड़ पूरी तरह जली हुई है सूजन, जलन, चुभन... सब एक साथ दर्द इतना कि रोना आ रहा है लेकिन... सजा पूरी हो गई।”

फिर प्रिया डेस्क पर लेटी रही।

और उसकी नंगी, लाल-सूजी गांड़ हवा में थी राघव ने पट्टा रख दिया उसने प्रिया की पीठ पर हाथ फेरा “अब तुम समझ गई होगी कि गलती की सजा कैसी होती है।

रिपोर्ट मैं हल्की कर दूंगा लेकिन अगली बार ऐसी गलती हुई तो यह सजा और लंबी होगी” प्रिया धीरे-धी कपड़े पहनी हर कदम पर उसे अपनी सूजी हुई गांड़ का तेज दर्द महसूस हो रहा था बैठने की हिम्मत नहीं थी वह लंगड़ाती हुई थाने से निकली उस रात घर जाकर प्रिया ने आईने में अपनी गांड़ देखी – पूरी तरह लाल, पट्टे के गहरे निशानों से भरी, सूजी हुई।

और हर बार छूते ही तेज दर्द होता।

और वह बिस्तर पर पेट के बल लेटी और सोचने लगी अब वह कभी भ्रष्टाचार नहीं करेगी लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती... अगले कुछ दिनों तक प्रिया को हर बार कुर्सी पर बैठते समय, चलते समय, सोते समय पट्टे की मार याद आती सूजन तीन दिन तक रही निशान एक हफ्ते तक।

और हर बार दर्द की याद से उसका शरीर कांप जाता।

और राघव ने उसे चेतावनी दी थी – “अब तुम मेरी नजर में हो गलती हुई तो फिर पट्टा चलेगा... और इस बार सिर्फ गांड़ पर नहीं, बल्कि और भी कहीं” प्रिया अब सच्ची और सही पुलिस अधिकारी बन गई लेकिन उसकी गांड़ पर पड़े निशान उसे हमेशा याद दिलाते कि सजा कितनी दर्दनाक हो सकती है।

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